हमारा उद्देश्य है :-
1.भारतीय संस्कृति और नागरिक समाज के मूल्यों को बनाए रखने के आदर्शों को बढ़ावा देता है और बहुसंख्यक हिंदू समुदाय को “मजबूत” करने के लिए हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करता है l
2.सेवा मानव को मानव से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। सेवा करना तप समान है। सेवा करने वाले के हृदय में प्रेम, करुणा, उदारता, परोपकार और सहनशीलता का होना आवश्यक है।
3.उत्तम संस्कृति का अनुसरण अपने पूर्ण पुरुषार्थ द्वारा शारीरिक एवं चारित्रिक बल को अर्जित कर मानवमात्र की सेवा में लगा देना ही उद्देय है।
ट्रस्ट के उद्देश्य:-
1.यह ट्रस्ट सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करेगा वा उत्थान हेतु कार्य करता है
राम नाम का प्रचार प्रसार क्योंकि रामचरितमानस में कहा गया है
रामनाम से ही सारे संकट टल जाते हैं । कलयुग में केवल प्रभु का स्मरण ही भव से पार किए जाने का एक मात्र आधार है।
‘कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा’
2.हिंदू पौराणिक पुस्तकों व अन्य हिंदू धार्मिक ग्रंथों एवं महापुरुषों के पुस्तकालय का भी स्थापना करेगा ।
3.हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार हेतु पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन किया जाएगा ।
4.दैवीय प्राकृतिक आपदाओं का आकस्मिक आपदाओं के समय लोगों की हर संभव सहायता प्रदान करना ।
5.समाज के वंचित वाह निराश्रित लोगों के आजीविका का समर्थन करना ।
6.समाज के आर्थिक रूप से कमजोर हिंदू धर्म के लोगों को आर्थिक सहायता प्रदान करना ट्रस्ट के विकास हेतु उसके उद्देश्यों का पत्र-पत्रिकाओं सोशल मीडिया अथवा डिजिटल मीडिया के द्वारा प्रचार प्रसार करना।
7.याह ट्रस्ट श्री सोखा शंभू नाथ हिंदू धर्मार्थ चैरिटेबल ट्रस्ट ग्राम छरौछा उर्फ सूखा पुरवा पोस्ट समस्तीपुर जिला बस्ती के साथ-साथ भारत अथवा विश्व में मंदिरों का निर्माण व जीर्णोद्धार विस्तार भी करेगा ।
8.हिंदू समाज के उत्थान के लिए जाति प्रथा का अंत करने के उद्देश्य हेतू काम करना तथा समाज के सवर्णों एवं दलितों को एकजुट करना भारत अथवा विश्व में किसी भी मंदिर पर जहां पुजारी ना हो सनातन धर्म के प्रचार प्रसार हेतु पुजारी का व्यवस्था करने का प्रयत्न करना।
9.भारत में गुरुकुल परंपरा की स्थापना करना हिंदू समाज के लोगों की स्वास्थ्य स्वास्थ्य व्यवस्था को देखते हुए चिकित्सालय की स्थापना करना के आधुनिकरण हेतु आधुनिक शिक्षा की व्यवस्था करना l
10.सनातन धर्म से समाज को जोड़ने के लिए समय-समय पर प्रसाद वितरण भंडारा एवं रक्तदान शिविरों का आयोजन करना l
11.समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने हेतु अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ श्री राम कथा गीता प्रवचन इत्यादि का आयोजन करना निर्धन छात्र छात्राओं को शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रवृत्ति देना या उनकी उचित शिक्षा की व्यवस्था करना l
12.वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण को सुरक्षित करना ऐसे जरूरतमंद व्यक्तियों को अक्षम है, विकलांग है, मानसिक या शारीरिक रूप से कमजोर है या निर्धन वर्ग के हैं उनके उत्थान व जीविकोपार्जन के लिए आर्थिक सहायता करना एवं उनके जीविकोपार्जन के लिए लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना करना मनुष्य में करुणा, प्रेम और मैत्री का प्रसार करना गौ सेवा एवं गोवंश का संरक्षण हेतु गौशाला एवं चारा की व्यवस्था करना गोवंश अथवा जानवरों की चिकित्सा हेतु पशु चिकित्सालय की व्यवस्था करना l
13.समाज में वृद्धजनों की सेवा करना एवं विद्या समूह का निर्माण करना सनातन धर्म हिंदू समाज के महिलाओं के उत्थान हेतु कार्य करना ट्रस्ट में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं का क्रय था स्थानीय बाजार में उपलब्ध ताकि विशेष परिस्थितियों में यह नियम लागू नहीं होगा कमी होने की दशा में सिर्फ हिंदू संस्थानों से ही किया जाएगा l
14.न्याय के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इसके साथ आया इसके क्रियाकलापों को आवश्यकता अनुसार अन्य जिला प्रदेशों में स्थापित करना या फैलाना युवकों को प्रथम वरीयता देना सभी प्रकार का योगाभ्यास करवाना पड़ना एवं शिक्षण संस्थान खोलना एवं विभिन्न शहरों एवं ग्रामीण अंचलों में शाखा स्थापित करना शिक्षण कार्य करना एवं डिप्लोमा सर्टिफिकेट प्रदान करना l
15.सामाजिक धर्मार्थ हेतु मंदिर का निर्माण करना तथा सनातन धर्म के देवी-देवताओं एवं महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना एवं प्रचार प्रसार करना l
16.व्यवसायिक वृद्धि हेतु समूह का गठन करना आपसी सहयोग से धन एकत्र कर एक दूसरे की मदद करना शहीद सैनिकों के विधवाओं एवं परिवार के बच्चों के लिए शिक्षण अथवा भरण पोषण की व्यवस्था करना तथा उनके लिए राष्ट्रहित में जन समुदाय के बीच जैसे सार्वजनिक स्थल व्यवसायिक अस्थल मंदिर अस्पताल एवं सामाजिक स्थल पर दान लेना एवं दान पेटी रखना अथवा कैंप लगाकर चंदा इकट्ठा करना उनकी सहायता करना l
17.धार्मिक तथा तथा हिंदू धर्म के वचन एवं सत्संग का आयोजन करना ट्रस्ट द्वारा गरीबों को स्वास्थ्य संबंधी कैंप लगाकर निशुल्क दवा का वितरण करना सलाह देना एवं ट्रस्ट का प्रचार प्रसार करना l
18.ट्रस्ट द्वारा हिंदू धर्म के जरूरतमंद लोगों को आवश्यकता अनुसार धन व जरूरत का सामान है ऋण के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा और इनसे समय अनुसार ऋण को वापस प्राप्त किया जाएगा इस पर कोई ब्याज दे नहीं होगा l





