सत्य सनातन वैदिक धर्म अपने हिंदू धर्म के वैकल्पिक नाम से भी जाना जाता है। प्राचीन काल में भारतीय उपमहाद्वीप के धर्म के लिये इसे ‘सनातन धर्म’ नाम मिला।
‘सनातन’ का अर्थ होता है – शाश्वत अर्थात ‘हमेशा बना रहने वाला‘, या जिसका न आदि है न अन्त ।

सत्य सनातन धर्म मूलतः भारतीय धर्म है, जो किसी समय में पूरे बृहत्तर भारत (भारतीय उपमहाद्वीप) तक व्याप्त रहा है। लेकिन कई अलग अलग कारणों से हुए भारी धर्मान्तरण के बाद भी विश्व की बहुसंख्यक आबादी इसी धर्म में आस्था रखती है।
“यह पथ सनातन है। समस्त देवता और मनुष्य इसी मार्ग से पैदा हुए हैं तथा प्रगति की है। हे मनुष्यों आप अपने उत्पन्न होने की आधाररूपा अपनी माता को विनष्ट न करें। “
—ऋग्वेद-3-18-1
बिनु सत्संग विवेक न होई।
राम कृपा बिनु सुलभ न सोई॥
सठ सुधरहिं सत्संगति पाई।
पारस परस कुघात सुहाई॥
अर्थ : सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और राम जी की कृपा के बिना वह सत्संग नहीं मिलता, सत्संगति आनंद और कल्याण की जड़ है। दुष्ट भी सत्संगति पाकर सुधर जाते हैं जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सुंदर सोना बन जाता है।
जा पर कृपा राम की होई।
ता पर कृपा करहिं सब कोई॥
जिनके कपट, दम्भ नहिं माया।
तिनके ह्रदय बसहु रघुराया॥
अर्थ : जिन पर राम की कृपा होती है, उन्हें कोई सांसारिक दुःख छू तक नहीं सकता। परमात्मा जिस पर कृपा करते है उस पर तो सभी की कृपा अपने आप होने लगती है । और जिनके अंदर कपट, दम्भ (पाखंड) और माया नहीं होती, उन्हीं के हृदय में रघुपति बसते हैं अर्थात उन्हीं पर प्रभु की कृपा होती है।

